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किराना स्टोर v/s सुपरमार्केट – दोनों में क्या अंतर है?

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किराना स्टोर ऐसी दुकान हैं जहा रोज़ की जरूरतों वाली चीज़े और आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले किराने के  प्रोडक्ट्स मिलते हैं, जबकि सुपरमार्केट एक बड़ी सेल्फ-सर्विस रिटेल शॉप हैं जो भोजन और अन्य घरेलू सामानों की एक लंबी रेंज बेचती हैं। 

इन दोनों की अपनी-अपनी खूबियां और खामियां हैं, लेकिन दोनों ही मुनाफे के कारोबार साबित हुए हैं। एक किराना स्टोर खोलने की इन्वेस्टमेंट के लिए मध्यम राशि की जरूरत है, जबकि एक सुपरमार्केट खोलने में भारी लागत शामिल होती है । एक स्टोर के लिए सही इलाका चुनना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि बिजनेस की सफलता के लिए यह अनिवार्य है कि ग्राहक स्टोर तक आसानी से पहुंच सके।

सुपरमार्केट के कारोबार में जहां जाने-माने ब्रांड्स हाथ आजमा रहे हैं, वहीं अन्य बड़ी रिटेल कंपनियां भी हैं, जो मॉडर्न टच देकर किराना स्टोर्स की क्षमता का पूरा फायदा उठाने की प्लानिंग कर रही हैं । 

आइए देखते हैं कि एक किराना स्टोर और एक सुपरमार्केट में क्या अंतर है।

ऑपरेट करने का खर्चा

एक सुपरमार्केट को ऑपरेट करने का खर्चा, एक किराना स्टोर से बहुत अलग होता है। दोनों को री-स्टॉकिंग, कर्मचारियों का भुगतान, बिजली का बिल और खर्च के अन्य क्षेत्रों, लेकिन अलग-अलग पैमानों पर खर्चा उठाना पड़ता है। किराना स्टोर में कर्मचारियों की संख्या में ज़रूरत, कम या फिर बिलकुल नही होती, जबकि एक सुपरमार्केट में आकार और बाजार की मांग के हिसाब से कर्मचारियों की एक विशेष संख्या की जरूरत होती है ।

इन्वेंट्री पर कम खर्चा

चूंकि सुपरमार्केट आकार में बड़ा है और माल की एक भारी रेंज प्रदान करता है, इसलिए बिजली का बिल और री-स्टॉकिंग का खर्चा ज़्यादा होता है । हालांकि री–स्टॉकिंग भारी छूट के साथ थोक मात्रा में होती है, यह भी खर्चे में काफी बढ़ाव लाती है।

प्रोडक्ट्स

एक सुपरमार्केट, किराना स्टोर की तुलना में प्रोडक्ट्स की एक विशाल रेंज प्रदान करता है और इसलिए किराना स्टोर से हल्का बेहतर है क्योंकि ग्राहक की सभी आवश्यकताओं को एक ही छत के नीचे पूरा किया जाता है। एक किराना स्टोर, किराने के सामान और कम मात्रा में खरीदारी तक ही सीमित होता हैं। 

ग्राहकों पर ध्यान देना

किराना स्टोर हर एक ग्राहक पर अलग से ध्यान देता हैं, जो ग्राहकों को बरकरार रखने में मदद करता है। ग्राहकों के साथ सीधा बातचीत करने से मालिक को सर्विस का फीडबैक मिल सकता है और इस तरह उन्हें खामियों को भरने का मौका मिल सकता है। ग्राहक की लगातार खरीद और ग्राहकों में ब्रांडों के प्रति इच्छा पर नजर रखी जा सकती है और फिर बाद में उसका लाभ लिया जा सकता है।

यह सब भी, दुकान के मालिक को, बाजार के ट्रैंड्स के साथ अप–टू–डेट रहने में मदद करता है । ग्राहकों की लगातार विजिट्स तालमेल बनाने में मदद करती हैं और बल्क ऑर्डर प्राप्त करने की संभावना को भी सुधारती हैं। इस तरह का ध्यान सुपरमार्केट व्यक्तिगत स्तर पर नही दे सकता क्योंकि ग्राहकों का इनफ्लो ज्यादा होता है, और बातचीत भी कम से कम होती है।

मंथली क्रेडिट सिस्टम

यह फिर से एक किराना स्टोर में संभव तालमेल बनाने की वजह से है। ग्राहकों और स्टोर के मालिक के बीच आपसी विश्वास मौजूद होने से ग्राहक, एक समय में एक बार, पहले की गई सभी खरीदारी का भुगतान करने का लाभ उठा सकता है। यह कभी-कभी नुकसान साबित हो सकता है क्योंकि क्रेडिट को समय पर वसूलने की जरूरत होती है ताकि कारोबार को बचाए रखा जा सके।

सुपरमार्केट में मंथली क्रेडिट सिस्टम के लिए कम या लगभग कोई गुंजाइश नहीं है और इसलिए भुगतान आइटम खरीदने के समय ही किया जाता है । क्रेडिट कार्ड सुपरमार्केट में इस्तेमाल किया जा सकता है । देश के कोने-कोने तक डिजिटाइजेशन पहुंचने के साथ ही अब किराना स्टोर और सुपरमार्केट दोनों ही डिजिटल पेमेंट की सुविधा ऑफर करते हैं।

डिलीवरी सिस्टम

पड़ोस में स्थित छोटे किराना स्टोर भी डिलीवरी-टू-डोर का ऑप्शन देते है जो कि अक्सर काम में आता है। सुपरमार्केट भी अब डिलिवरी सिस्टम लेकर आ रहे हैं, लेकिन इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए जिन प्रोडक्ट्स को ऑर्डर करने की जरूरत है, उनकी संख्या और कीमत पर एक लिमिट लगी हुई है ।

वेटिंग टाइम

किराना स्टोर्स में ग्राहक उनकी सेवा के लिए स्टाफ पर निर्भर हैं, जबकि सुपरमार्केट्स के पास अपने सभी प्रॉडक्ट्स डिस्प्ले पर हैं, इस से वेटिंग टाइम काफी कम हो जाता है और ग्राहक को सभी ब्रांड्स की तुलना करने और उनके बीच चुनने का ऑप्शन भी मिलता है ।

स्टोर डिजाइन

सुपरमार्केट के पास यहां पर एक फायदा है । उनके विशाल आकार के कारण, वे अपने सभी प्रोडक्ट्स का एक आकर्षक प्रदर्शन कर सकते हैं, जो बिक्री में सुधार करने और ग्राहकों के वेटिंग टाइम को भी कम करने में असरदार साबित हुआ है। उनके पास उचित संख्या में कैश काउंटर मौजूद हैं जो भीड़ को बाँटने में मदद करते हैं।

इनस्टोर पूरे भारत में बड़े सुपरमार्केट ब्रांड्स को सफलतापूर्वक डिजाइन कर रहा है ।

100 sq.ft. से 1000 sq.ft. तक के छोटे फॉर्मेट के किराना स्टोर को मॉडर्न बनाने के लिए कस्टमाइज्ड रैक्स, शेल्व्स और फिक्सचर्स की एक पूरी रेंज प्रदान करने के लिए भी प्रसिद्ध है। इनस्टोर आपके स्टोर को इस तरह से डिज़ाइन करता है कि आपको अधिकतम प्रोडक्ट डिस्प्ले की पेशकश करते समय आपकी स्पेस बिखरी हुई ना लगे । आपके किराना स्टोर या सुपरमार्केट को एक अनोखा, शॉपिंग–फ्रैंडली लुक मिलेगा और यह आपको इनवेस्टमेंट पर अधिक रिटर्न लाएगा। इनस्टोर डिज़ाइन आपकी स्पेस को ऑप्टिमाइज करते हैं और दुकानों को सुपरमार्केट के साथ कड़ी टक्कर का बराबर मौका देते हुए ग्राहकों का अधिक इनफ्लो आकर्षित करते हैं।

हेरफेरी की गुंजाइश

ज्यादातर किराना स्टोर ढीली पैकिंग वाले प्रॉडक्ट्स बेचते हैं, जिस में मिलावट की गुंजाइश होती है। प्रोडक्ट्स की क्वालिटी की गारंटी नहीं है, पैक की गई वस्तुओं को छोड़कर। सुपरमार्केट बहुत सारे प्रसिद्ध ब्रांडों का समर्थन करते हैं और इसलिए ग्राहकों को प्रोडक्ट्स की क्वालिटी का आश्वासन दिया जा सकता है। ग्राहक ढीले पैकिंग वाले प्रॉडक्ट्स खरीदने की तुलना में उन प्रोडक्ट्स को खरीदने के साथ ज़्यादा कंफर्टेबल होते हैं जो प्रसिद्ध ब्रांडों से जुड़े होते हैं।

रिटेल क्षेत्र में बढ़ते मॉडर्नाइजेशन के कारण पूरे भारत में बहुत सारे सुपरमार्केट खुल गए हैं, जिनमें ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में हैं । 2000 में सिर्फ 400 सुपरमार्केट थे, और 2016  तक यह संख्या 8.5 हजार हो गई । इसके साथ ही भारत में 12 मिलियन से ज्यादा छोटे स्टोर हैं, जिनके खाते में भारतीय F&G मार्केट के 90% शेयर हैं। यहां तक कि Reliance Industries, Walmart India, Amazon और अनेक FMCG कंपनियां जैसे Hindustan Unilever आदि रिटेल दिग्गजों ने भी किराना स्टोर्स के साथ काम करने के लिए कई तरह के एंगेजमेंट मॉडल बनाने का प्रयास किया है जो उन्हें माडर्न बनाने में मदद करेंगे ।

इसलिए सुपरमार्केट और किराना स्टोर दोनों ही मुनाफे के बिजनेस मॉडल हैं, और देश के आर्थिक विकास के लिए बहुत जरूरी हैं । अपने बिजनेस को सावधानी से चुनें, उस पे व्यवस्थित रूप से काम करें, और आगे बढ़ें। शुभकामनाएँ।

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